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भाभी के रसभरे हुस्न का जवाब नहीं


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मेरा नाम शक्ति है और मैं बिहार का रहने वाला हूं। मैं अपनी छोटी सी उम्र में ही काम करने के लिए कोलकाता आ गया था। उस वक्त मेरी उम्र 18 वर्ष थी और आज मेरी उम्र 35 वर्ष हो चुकी है। मैं पहले दुकान में काम करता था और कई वर्षों तक मैंने वहां पर काम किया लेकिन एक दिन मुझे मेरे दुकान के मालिक ने दुकान से निकाल दिया और कहा कि तुम चोरी करते हो। मैंने उसे कहा साहब आपने मेरी ईमानदारी का मुझे यही सिला दिया है। मैंने इतने साल तक आपके यहां मेहनत की है और आपने मुझ पर चोरी का इल्जाम लगाकर मुझे दुकान से निकाल दिया। मुझे इस चीज का बहुत दुख है। फिर मैंने वहां से काम छोड़ दिया और उसके बाद मैंने अपनी एक चाय की ठेली लगानी शुरू कर दी। मैं जिस जगह पर अपनी चाई की ठेली लगाता था वहां पर मेरा काम अच्छा चलने लगा था और मैं अपनी दो वक्त की रोटी के लिए गुजारा कर लेता था। काफी समय तक मैंने वहां पर काम किया लेकिन एक बार मुझे अपने घर जाना पड़ा।

मैं जब अपने गांव गया तो मुझे कुछ समय वहीं पर रुकना पड़ गया और मैं जब कोलकाता वापस लौटा तो जिस जगह पर मैं अपनी ठेली लगाता था उस जगह पर कोई और ही व्यक्ति ठेली लगाने लगा था। अब मेरे सामने यह समस्या थी कि मैं क्या काम करूं। मैं कुछ दिन तक तो खाली बैठा रहा। एक दिन मेरे एक दोस्त ने मुझे कहा कि मेरे पास एक जगह है यदि तुम वहां पर अपना काम शुरू कर सकते हो तो देख लो। मैंने उससे कहा तो भाई देर किस चीज की है। मैं काफी दिनों से खाली बैठा हूं। हम लोग जल्दी से वहां पर चलते हैं। उसने कहा तो चलो फिर मैं तुम्हें वह जगह दिखा देता हूं। उसने मुझे वह जगह दिखा दी वहां पर काफी बड़ा ग्राउंड था और उसके बाहर पर उसने मुझे कहा कि तुम यहां पर लगा सकते हो। मैंने उसे कहा जगह तो बहुत बढ़िया है। वह कहने लगा कि तुम यहां पर काम तो शुरू करो तुम्हारा काम बहुत अच्छा चलेगा।

जब मुझसे मेरे दोस्त ने यह बात कही तो मैंने कहा मैं कल से यहां पर अपना काम शुरू कर देता हूं। मैंने उसके अगले दिन से ही अपना काम शुरू कर दिया। शुरुआत में तो मैं चाय बेचता लेकिन वहां पर इतने ज्यादा चाय पीने वाले नहीं आते। मैंने सोचा कि मैं कुछ और काम शुरू कर लूँ। मैंने अब समोसे बनाने शुरू कर दिए थे और मेरा समोसे का काम अच्छा चलने लगा। उसके साथ मेरी चाय भी बिक जाया करती। मेरा काम तो अच्छा चलने लगा था और मेरे पास लोग भी आने लगे थे। वह लोग मुझसे कहते कि तुम समोसे तो बड़े अच्छे बनाते हो। मैं जब समोसे बना रहा था तो उस वक्त मेरे पास एक व्यक्ति आये वह कहने लगे कि तुम यहां कितने बजे से काम कर रहे हो? मैंने उसे कहा मुझे तो यहां दो घंटे आए हुए हो चुके हैं। वह मुझसे कहने लगा कि क्या तुम्हारे पास कोई महिला आई थी? मैंने उसे कहा साहब यहां तो कोई महिला नहीं आई। मैं पिछले दो घंटे से काम कर रहा हूं। वह कहने लगे कि मेरी पत्नी तो यही बोल कर निकली थी कि वह समोसे लेने जा रही है लेकिन अब तक नहीं लौटी है। मैंने उनसे कहा आपकी पत्नी आ जाएंगे आप चिंता मत कीजिए। वह कहने लगे कि 2 घंटे से ऊपर हो चुके हैं और मुझे समझ नहीं आ रहा कि उसने मुझसे झूठ क्यों बोला। जब उन्होंने मुझसे यह बात कही तो वह बड बडाते हुए उसके बाद वहां से चले गए। मैंने उनका चेहरा तो देख ही लिया था और उसके कुछ दिनों बाद वह मेरे पास आया और कहने लगे कि भैया गरमा गरम समोसे पैक कर दो। उनके साथ उस दिन उनकी पत्नी भी थी। मैंने उनसे कहा कि आप की पत्नी मिल गई? वह कहने लगे कि हां मेरी पत्नी मिल गई। उनकी पत्नी भी हंसने लगी। वह मुझे कहने लगी कि मैं आपकी बात समझी नहीं। मैंने उन्हें सारा माजरा बताया और कहा कि कुछ दिनों पहले भाई साहब मेरे पास आए और पूछने लगे कि मेरी पत्नी आपके पास समोसे लेने आई थी लेकिन वह दो घंटे से घर नहीं पहुंची है। वह महिला कहने लगी कि मैं दूसरी जगह समोसे लेने गई थी और उन्हें लगा कि मैं आपके पास आई हूं। जब मैं वहां समोसे लेने गई तो उस वक्त मेरी एक सहेली मिल गई। उससे बातों बातों में इतना समय निकल गया कि मुझे पता ही नहीं चला और जैसे ही मैं घर पहुंची तो यह मुझ पर गरम हो गए और कहने लगे कि तुम इतनी देर से कहां थी? मैं तो समोसे वाले को भी पूछ कर आया हूं। तुम तो वहां समोसे लेने गई ही नहीं। मैंने इन्हें जब सारी बात बताई तो उसके बाद यह मुझे कहने लगे कि तुम जहां भी जाती हो मुझे कम से कम बता तो दिया करो।

मैंने कहा कभी कबार ऐसा हो जाता है और बातों बातों में मैंने उनके समोसे भी पैक कर दिए। वह लोग समोसे लेकर चले गए और मैं भी अपने काम पर लग गया। मेरे पास भी अब कॉलोनी के लोग आते हैं और वह समोसे लेकर जाते हैं। मेरी बिक्री तो बढ़ने ही लगी थी। मैं अपने काम से भी खुश था। एक दिन मेरा दोस्त आया और वह कहने लगा भैया काम कैसा चल रहा है? मैंने उसे कहा काम तो अब बहुत ही बेहतरीन चल रहा है। मैंने उसे भी अपने बनाए हुए समोसे खिलाया और कहा लो दोस्त तुम भी समोसे चख कर देखो उसने कहा समोसे तो बड़े ही बेहतरीन बने हैं वह भी कुछ देर बाद निकल गया। काफी दिनों बाद मेरे पास वही महिला आई और कहने लगी भैया मेरे लिए गरमा गरम समोसे पैक कर दो। जब उसने मुझसे यह बात कही तो मैंने कहा हां जी मैडम आप समोसे ले जाइए मैंने उनके लिए समोसे पैक कर दिए। वह अक्सर मेरे पास आने लगी मुझे उनका नाम भी पता चल गया था उनका नाम रवीना है।

एक दिन वह मेरे पास आई उस दिन वह पसीना पसीना हो रही थी जब वह मेरे पास आई तो कहने लगी आप आज मेरे घर आ जाइए। मैंने उन्हें कहा मैडम ऐसे ही किसी के घर में नहीं जा सकता। उन्होंने मुझे कहा यह पैसा आप ले लो और रात को मेरे घर आ जाना। मेरे दिमाग में सारा माजरा समझ आ गया और उनका बदन देखकर तो मै बड़ा ही खुश हो गया। मैं रात को उनके घर पर गया तो उस वक्त उनके पति घर पर नहीं थे मैंने उनसे पूछा आपके पति कहां है ? वह कहने लगी मेरे पति कहीं गए हुए हैं। वह आज देर रात को लौटेंगे लेकिन मेरी चूत में सुबह से ही खुजली हो रही थी मैंने सोचा मैं आपसे अपनी चूत की खुजली मिटा लूं। मैंने भी अपने लंड को बाहर निकाला उन्होंने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया। जब वह मेरे बड़े लंड को अपने मुंह के अंदर ले कर चूसती तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने जब उनके कपड़े उतारने शुरू किए तो उन्होंने उस दिन ब्लैक कलर की पैंटी और ब्रा पहनी थी उसमें वह बड़ी है मस्त लग रही थी और उनकी अदाएं तो जैसे मेरे ऊपर जादू कर रही थी। मैंने उनके गोरे बदन को सहलाना शुरू किया और जब मैंने उनके स्तनों को चूसना प्रारंभ किया तो मुझे मजा आने लगा। मैंने उनके स्तनों पर अपने दांत के निशान भी मार दिए वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई थी। वह मुझे कहने लगी अब मुझसे रहा नहीं जा रहा तुम मेरी चूत का भेदन कर दो। मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर डाल दिया जैसे ही मेरा मोटा लंड उनकी चूत में घुसा तो उनके मुंह से आवाज निकलने लगी मैं बड़ी तेज गति से उन्हें धक्के मारने लगा। उनकी योनि से लगातार पानी का रिसाव हो रहा था और मेरा लंड भी उनकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था। उनके अंदर इतनी ज्यादा गर्मी पैदा होने लगी वह मुझे कहने लगी मुझसे तो बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा मैं कुछ समय बाद ही झडने वाली हूं। मैंने उन्हें कहा लेकिन अभी तो मैंने शुरुआत ही की है। वह कहने लगी आज सुबह से मेरी चूत में खुजली है इसीलिए मैं तुम्हारा साथ ज्यादा देर तक नहीं दे पाऊंगा लेकिन तुम मुझे चोदते रहो जब उनकी इच्छा पूरी हो गई तो वह अपने पैर खोल कर मेरे सामने लेटी हुई थी और मैं बड़ी तेज गति से चोदे जा रहा था। जैसे जैसे मेरा लंड अंदर बाहर होता तो मेरी गर्मी बढ़ जाती मै ऐसे ही उनकी चूत मारता रहा। जब मेरा वीर्य पतन होने वाला था तो मैंने अपने वीर्य को उनके बड़े स्तनों के ऊपर गिरा दिया जिससे कि वह भी खुश हो गई। मैंने उनसे पूछा उस दिन आप 2 घंटे अपनी सहेली के साथ नहीं थी? वह कहने लगी हां मैं उस दिन अपने एक आशिक के साथ चली गई थी उसने ही उस दिन मेरी इच्छा पूरी की।


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